नीतीश सरकार के दावों की उड़ रही धज्जियां, इस विद्यालय में 618 विद्यार्थियों के लिए महज 5 कमरे


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Patna: बिहार में नीतीश सरकार के तमाम दावों और वादों के बाद भी सरकारी स्कूलों में बुनियादी सुविधाओं का घोर अभाव है। आज हम बात कर रहे हैं उच्च माध्यमिक विद्यालय चोवार की। सुविधाओं के अभाव में विद्यालय में अध्ययनरत बच्चों सहित शिक्षकों को भी दिक्कतों का सामना करना पड़ता है।

दरसल वर्ष 1932 में स्थापित मध्य विद्यालय को वर्ष 2016 में उच्च का दर्जा तो मिल गया, लेकिन न सुविधाएं दी गई और न ही शिक्षकों की नियुक्ति हुई। शिक्षकों के लिए प्रधानाध्यापक द्वारा कई बार विभाग को पत्र लिखा गया, लेकिन कोई सुनवाई नहीं हुई। विद्यालय में कुल सात कमरे हैं। एक में कार्यालय और एक कमरे में एमडीएम बनता है। दो कमरों में उच्च विद्यालय की कक्षाएं चलती हैं। शेष कमरे में एक से आठ तक की कक्षाएं लगती हैं। जगह के अभाव में एक कमरे में दो-दो कक्षाएं लगती हैं। उच्च विद्यालय के लिए भवन के लिए जमीन की मापी कर इंजीनियर गए, लेकिन आज तक कार्य शुरु नहीं हो सका।

तो वहीं कक्षा एक से आठ तक 416 छात्र नमाकित हैं। वर्ग नौ में 124 और दसवीं में 78 छात्र नमाकित है। मध्य विद्यालय में प्रभारी प्रधानाध्यापक को लगाकर यहां महज 10 शिक्षक कार्यरत हैं। इसमें से एक शिक्षक का प्रतिनियोजन विभागीय आदेश पर प्रखंड कार्यालय में किया गया है। आदेशपाल, ‌र्क्लक का पद खाली है। पेयजल के लिए लगे तीन चापाकल में से दो काफी समय से खराब है। बेंच-डेस्क की कमी से विद्यार्थी जमीन पर बैठने को मजबूर हैं। हालांकि, शौचालय की व्यवस्था ठीक है। दो बालिका और एक बालक के लिए शौचालय बने हैं।

इस संबंध में विद्यालय के प्रधानाध्यापक मुन्ना कुमार ने कहा कि शिक्षक के अभाव में उच्च विद्यालय का संचालन कर पाना बहुत मुश्किल हो रहा है। विभाग को भवन और शिक्षक की व्यवस्था कराने के लिए पत्र दिया गया है। उच्च विद्यालय का संचालन मवि के शिक्षकों के सहारे कर रहे हैं। उच्च विद्यालय में नामाकित छात्रों की पढ़ाई की जा रही है। ऐसे में नीतीश सरकार को जल्द ही कोई ठोस कदम उठाना पड़ेगा।


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