बेटी की शादी में माँ का निधन, छोटी बहन ने पहले किया कन्यादान, फिर दिया माँ की अर्थी को कंधा


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भगवान भी कभी ऐसे ऐसे खेल खेलता हैं जिसे समझ पाना हम इंसानों के बस की नहीं होती हैं. अब हाल ही में रीगंगानगर में हुई इस शादी को ही ले लीजिए. आमतौर पर शादी एक ऐसी चीज होती हैं जिसमे पुरे परिवार की खुशियाँ शामिल होती हैं. जब किसी माता पिता की बेटी की शादी होती हैं तो वो कई सपने सजाते हैं. वे अपनी बेटी की इस शादी में कोई भी कसार नहीं छोड़ना चाहते हैं. लेकिन जरा सोचिए क्या होगा जब इस शादी वाले दिन ही परिवार के ऊपर मुसीबत का एक ऐसा पहाड़ टूट पड़े जिसके बारे में किसी ने सपने में भी नहीं सोचा होगा. क्या होगा यदि बेटी के शादी वाले दिन ही उसकी माँ का देहांत हो जाए. यकीनन ये किसी भी परिवार के लिए सबसे मुश्किल की घड़ी होगी. लेकिन इस मुश्किल की घड़ी में अंजली नाम की एक लड़की ने बड़ा ही डट कर सामना किया. जब आप अंजलि के दिल का हाल सुनोगे तो आपकी आँखें भी नम हो जाएगी.

दरअसल रामसिंहपुर की रहने वाली अंजलि (वेद प्रकाश बाघला ) की एक बड़ी बहन हैं आँचल, जिसका विवाह बीते शनिवार ही हुआ. शादी वाले दिन आँचल दुल्हन की तरह सज के तैयार हुई और बरात भी चोखट पर आ गई. ऐसे में उसी समय अंजली और आँचल की माँ सुनीता की तबियत अचानक खराब हो गई. ऐसे में अंजलि के पिता वेडप्रकाश सुनीता को लेकर इलाज के लिए सूरतगढ़ पहुंचे. लेकिन सुनीता की हालत गंभीर होने की वजह से उन्हें श्रीगंगानगर रैफर किया गया. सुनीता का ब्लड प्रेशर अचानक लो हो गया था जिसकी वजह से उनकी तबियत लगातार बिगडती जा रही थी. उधर उनकी बड़ी बेटी आँचल दुल्हन बने अपने माता पिता का आशीर्वाद के लिए इंतज़ार कर रही थी. लेकिन फिर अचानक सुनीता इस दुनियां को छोड़ चली गई. ऐसे में सुनीता के जाने की खबर उसकी उसकी बड़ी बेटी आँचल और अन्य बारातियों को नहीं बताई गई, ताकि शादी में कोई बाधा ना आए.

सुनीता की मौत कि खबर घर के गिने चुने लोगो को ही पता थी जिसमे उनकी छोटी बेटी अंजलि भी शामिल थी. अंजलि को जैसे ही अपनी माँ की मौत की खबर मिली वो अंदर से टूट गई, लेकिन उस बच्ची ने इस दर्द को चेहरे पर नहीं आने दिया. चेहरे पर मुस्कान लिए उसने अपनी बड़ी बहन की शादी पूरी करवाई. जयमाला से लेकर बिदाई तक की रस्म और मेहमानों की खातिरदारी ये सभी अंजलि ने किया. यहाँ तक कि इस लकड़ी ने अपनी बड़ी बहन का कन्यादान भी किया.

बहन को सुबह ससुराल बिदा करने के बाद अंजली ने शाम को अपनी माँ की अर्थी को कन्धा दिया. जिस दिन एक लड़की की डोली घर से उठी उसी दिन उसकी माँ की अर्थी भी उठ गई. एक परिवार के लिए इससे बड़ी दुःख की बात भला क्या हो सकती हैं. इस दौरान अंजलि ने एक आदर्श बेटी होने का पूरा कर्तव्य निभाया. उसने एक ही दिन में माँ, पिता, बेटे सहित कई रोल निभा दिए. ऐसी दुःख की घड़ी में हमारी सहानुभूति इस परिवार के साथ हैं.


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