बड़ा क्रिकेटर होने के बावजूद राहुल द्रविड़ ने रचाई थी एक साधारण लड़की से शादी, जाने इनकी लव स्टोरी


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दोस्तों आप लोगो ने देखा होगा कि जब भी कोई व्यक्ति बड़ा आदमी बन जाता हैं, बहुत सफलता हासिल कर लेता हैं और ढेर सारे पैसे कमा लेता हैं तो वो अपने लिए किसी ख़ास जीवनसाथी की तलाश करता हैं. लेकिन आज हम आपको जमीन से जुड़े एक ऐसे क्रिकेटर से मिलाने जा रहे हैं जिसने अपने जीवनसाथी के रूप में किसी नामचीन हस्ती को नहीं बल्कि एक बेहद साधारण लड़की को चुना. ये लव स्टोरी हैं राहुल द्रविड़ और उनकी पत्नी डॉक्टर विजेता पेंढारकर की.

इंदौर में जन्मे राहुल की परवरिश ज्यादातर बेंगलुरु में हुई थी. वहीँ उनकी पत्नी विजेता की परवरिश देश के कई हिस्सों में हुई लेकिन बाद में वे नागपुर में सेटल हुई. दरअसल विजेता के पता एयर फ़ोर्स में थे इसलिए उनका तबादला होता रहता था. ऐसे में एक बार उनकी पोस्ट बेंगलुरु में हो गई. यहाँ उनकी मुलाकात राहुल के पिता से हुई और दोनों अच्छे दोस्त बन गए. इन दोनों फैमिली के आपस में दोस्त बनने के साथ साथ राहुल और विजेता भी एक दुसरे के दोस्त बन गए. लेकिन इन दोनों के बीच का कनेक्शन दोस्ती से कुछ ज्यादा था. इस दौरान राहुल को विजेता के प्यार हो गया. उस दौरान विजेता अपनी डॉक्टरी की पढ़ाई कर रही थी.

कुछ समय बाद विजेता के पापा का ट्रांसफर नागपुर हो गया ऐसे में उन्हें बेंगलुरु छोड़ जाना पड़ा. लेकिन राहुल और विजेता तब भी दोस्त बने रहे. राहुल इस दौरान बीच बीच में विजेता से मिलने नागपुर जाते रहते थे. इस तरह दोनों का प्यार और भी गहरा हो गया और राहुल ने विजेता को शादी के लिए प्रपोज कर दिया. राहुल और विजेता दोनों ही अलग अलग फिल्ड से थे. जहाँ एक तरफ राहुल एक नामचीन क्रिकेटर थे तो वही विजेता डॉक्टर वाली फिल्ड से थी. विजेता को उस दौरान क्रिकेट के बारे में कुछ भी नहीं पता था. हालाँकि दोनों का प्यार इतना गहरा था कि वो राहुल को मना नहीं कर पाई और दोनों ने 4 मई 2003 को शादी रचा ली.

आपकी जानकारी के लिए बता दे कि राहुल और विजेता दोनों ही बेहद साधारण और जमीन से जुड़े इंसान हैं. इन्हें किसी भी प्रकार का शो ऑफ करना पसंद नहीं हैं. साथ ही इनमे घमंड नाम की भी चीज नहीं हैं. राहुल की शादी के बाद कई लड़कियों के दिल टूट गए थे. राहुल उस समय काफी हैंडसम और अमीर कुंवारे लड़के हुआ करे थे. उन्हें ना जाने कितनी लड़कियों के लव लैटर रोज आते थे. लेकिन इसके बावजूद उनका दिल सिर्फ विजेता के ऊपर ही आकर अटका था.

राहुल ने विजेता को कभी किसी चीज के लिए नहीं रोका और उन्हें अपने सपनो को पूरा करने की पूरी आज़ादी दी. लेकिन विजेता ने राहुल के करियर के लिए अपनी इच्छा से बहुत बड़ा बलिदान दिया. उन्होंने डॉक्टर वाली लाइन छोड़ दी और वो एक हाउस वाइफ बन गई. इसके पीछे वजय ये थी कि विजेता चाहती थी कि राहुल अपने घर और बच्चों की टेंशन छोड़ दे और सिर्फ अपने क्रिकेट करियर पर फोकस करे. ऐसे में आप कह सकते हैं कि राहुल की सफलता के पीछे उनकी वाइफ का भी बड़ा हाथ हैं.

राहुल और विजेता की शादी को आज 16 साल हो चुके हैं लेकिन इसके बावजूद इनकी शादीशुदा जिन्दगी बेहद खुशहाल हैं. ये दोनों आज भी बेहद साधारण जिंदगी जीना पसंद करते हैं.


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