पुलवामा अटैक के बाद पीएम मोदी की बड़ी जीत, ब्लैकलिस्ट में शामिल हुआ पाकिस्तान का नाम


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जैसा कि आप सभी जानते हैं कि गुरूवार की शाम पुलवामा में हुए इस घटना के बाद पूरे देशभर में इसका आक्रोश देखने को मिल रहा है। वहीं ये भी बता दें कि इसके बाद से हर कोई सरकार से यही कह रहा है कि वो जल्द से जल्द पाकिस्तान से इसका बदला लें। आपको बताते चलें कि दुनिया में पाकिस्तान को अलग-थलग करने की प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की मुहिम असर दिखा रही है। दुनिया के कई देशों ने भी पाकिस्तान से कारोबारी संबंध खत्म करने का इशारा दिया है। पुलवामा हमले के बाद भारत पहले ही पाकिस्तान को मोस्ट फेवर्ड नेशन की सूची से बाहर कर चुका है।

इस अटैक के बाद भारत पहले ही पाकिस्तान को मोस्ट फेवर्ड नेशन की सूची से बाहर कर चुका है। इतना ही नहीं अब ये भी खबर आ रही है टेररिस्टों को फंडिंग करने और मनी लॉन्ड्रिंग से जुड़े मामलों में शामिल होने के कारण पाकिस्तान को “डर्टी मनी ब्लैकलिस्ट” सूची में डाला गया है। यूरोपियन देशों के संगठन यूरोपियन यूनियन ने पाकिस्तान को इस सूची में डाला है। इस सूची में पहले से भी कई देश मौजूद हैं और अब इस सूची में शामिल किए गए देशों की संख्या अब 23 हो गई है। ईयू सदस्य ने कुछ देशों के बैंकों को चूना लगाने, मनी लॉन्ड्रिंग करने और टेररिस्टों को आर्थिक मदद के आरोपों में यूरोपियन यूनियन कमीशन ने सऊदी अरब और पाकिस्तान समेत एक दर्जन देशों को ब्लैकलिस्ट किया है।

आपको बताते चलें कि इस लिस्ट में पहले से अफगानिस्तान, दक्षिण कोरिया, इथियोपिया, ईरान, पाकिस्तान, श्रीलंका, सीरिया, त्रिनिदाद एंड टोबैगो, ट्यूनीशिया और यमन भी शुमार है। इसके अलावा लीबिया, बोत्सवाना, घाना और बहामास को भी शामिल किया गया है। यूरोपीय देश इस लिस्ट में शामिल देशों के साथ कारोबारी रिश्तों को खत्म कर देते हैं। इतना ही नहीं ईयू का मानना है कि ‘डर्टी-मनी ब्लैकलिस्ट’ नेशंस की सूची में जिन्हें डाला जाता है, उनके साथ यूरोपीय देश कारोबारी संबंध खत्म कर देते हैं। हालांकि, इस फैसले का ईयू के ही कुछ देशों ने विरोध किया है। ब्रिटेन भी लिस्ट में शामिल देशों के साथ इकोनॉमिक संबंधों को लेकर चिंतित है।

अब सवाल ये उठता है कि इस फैसले के बाद यानि की यूरोपीय देश इस लिस्ट में शामिल देशों के साथ कारोबारी रिश्तों को खत्म करने से पाकिस्तान पर कितना असर पड़ेगा तो बताते चलें कि ऐसे में पाकिस्तानी कारोबारियों को कारोबार करने में कई परेशानियां उठानी पड़ेंगी। विशेषज्ञों का मानना है कि उन्हें आसानी से कर्ज नहीं मिलेगा। उनके लिए बिजनेस करना अब और मुश्किल भरा हो जाएगा। हालांकि ईयू कमीश्नर वेरा जुरोवा का मानना है कि डर्टी-मनी ब्लैकलिस्ट से सभी सदस्य देश सहमत होंगे क्योंकि बैंकिंग सेक्टर को मनी लांड्रिंग से खतरा बढ़ रहा है।

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