13 अप्रैल को एक साथ ही मनाई जाएगी अष्‍टमी और नवमी, पूजा और कन्‍यापूजन का शुभ मुहूर्त जानें


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इस दिन हिंदू नवरात्रों का समापन भी होता है इसलिए इसका अति महत्‍व माना जाता है । भगवान श्री राम ने लंका पर चढ़ाई से पहले शक्ति पूजा की थी …

New Delhi, Apr 11 : चैत्र नवरात्रि 2019 अब समापन की ओर है । शनिवार को अष्‍टमी के साथ ही रामनवमी का पर्व भी मनाया जाएगा । कई वर्र्षों बाद ये संयोग बन रहा है । जो लोग नवरात्र के दिनों में उपवास रख रहे हैं वो अष्‍टमी या फिर नवमी को ही इनका परायण करते हैं । 13 अप्रैल को ही अष्‍टमी है और इसी दिन रामनवमी भी मनाई जाएगी । धर्म कार्यों से जुड़े जानकार बताते हैं कि इस बार नवमी 13 अप्रैल से शुरू होकर 14 अप्रैल की सुबह तक रहेगी ।

रामनवमी का महत्व
चैत्र नवरात्रि का समापन राम नवमी के साथ होता है । मान्‍यता है कि इसी दिन भगवान श्रीराम का

जन्‍म हुआ था। ये त्‍यौहार हर वर्ष रामनवमी के रूप में मनाया जाता है । इस दिन हिंदू नवरात्रों का समापन भी होता है इसलिए इसका अति महत्‍व माना जाता है । भगवान श्री राम ने लंका पर चढ़ाई से पहले शक्ति पूजा की थी, इसलिए भी भगवान श्री राम और आदि शक्ति मां दुर्गा को एक ही समय में पूजा जाना बहुत ही शुभ माना गया है ।

रामनवमी, अष्टमी पूजा का शुभ मुहूर्त
शनिवार 13 अप्रैल सुबह 8 बजकर 16 मिनट तक अष्टमी की तिथि रहेगी ।  इसके बाद नवमी तिथि

शुरू हो जाएगी । कई भक्‍तजन रामनवमी के दिन ही नवरात्रि के नौ दिन तक किए गए व्रत का परायण करते हैं । 13 अप्रैल को  सुबह 8 बजकर 19 मिनट के बाद किसी भी समय कन्या पूजन किया जा सकता है ।

रामनवमी कन्या पूजन की संपूर्ण विधि
यदि आपने नवरात्र के व्रत रखें हैं, तो इसका परायण कन्‍या पूजन के साथ करना आवश्‍यक माना

गया है । कन्या पूजन के 9 कन्‍याओं और एक बालक अर्थात लंगूर को भोजन कराने का विधान हैं । उन्‍हें यथापूर्वक दान आदि देकर विदा किया जाना चाहिए । भोजन से पहले कन्‍याओं के पैर पखारें, ये कार्य दंपत्ति साथ में करें बहुत ही शुभ माना जाता है । उनके माथे पर टीका लगाएं, साथ ही उन्‍हें बैठाकर भोजन कराएं । भोजन के बाद फल आदि, दक्षिणा के साथ दें । इसके बाद आप स्‍वयं के व्रत का भी परायण कर सकते हैं ।


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