Video: किशनगंज से कौन बनेगा सांसद ?


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मिनी दार्जिलिंग नाम से मशहूर हैं किशनगंज लोकसभा क्षेत्र किशनगंज बिहार के 40 लोकसभा निर्वाचन क्षेत्रों में से एक है। जिला मुख्‍यालय होने के कारण यहां सभी बड़े सरकारी विभागों के दफ्तर हैं। इस क्षेत्र को कृष्‍णाकुंज के नाम से भी जाना जाता था। यह क्षेत्र बंगाल, नेपाल और बंगलादेश की सीमाओं से सटा हुआ है। यहां का खगरा मेला पूरे देश में मशहूर है। यहां के नेहरु शांति पार्क, चुर्ली किला लोगों के आकर्षण का केंद्र हैं। यहां से पानीघाट, गंगटोक, कलिंगपोंग, दाजर्लिंग जैसे पर्यटन स्‍थल भी कुछ ही दूरी पर स्थित है।

किशनगंज बिहार में राजधानी पटना से 375 किलोमीटर उत्तर–पूर्व में स्थित है. बंगाल, नेपाल और बंग्लादेश की सीमा से सटा किशनगंज पहले पूर्णिया जिले का अनुमंडल था. 1990 में ये जिला बना. यहां का सबसे नजदीकी हवाई अड्डा पश्चिम बंगाल का बागडोगरा है जो यहां से 90 KM की दूरी पर स्थित है.. बंगाल और सिक्किम के लिए भी यहां से बसें उपलब्‍ध हैं. यह लोकसभा सीट मुस्लिम बहुल है.

किशनगंज से कांग्रेस सांसद मौलाना असरार–उल–हक़ क़ासमी का निधन 7 दिसंबर 2018 को हो गया. 2019 आम चुनाव नजदीक होने के कारण यहां उपचुनाव नहीं कराए गए.

2019 के लिए बदल गए समीकरण

दिसंबर 2018 में किशनगंज के सांसद मौलाना असरार–उल–हक़ क़ासमी के निधन से यहां का राजनीतिक समीकरण पूरी तरह बदल गया. वर्ष 2014 के चुनावों में भाजपा की लहर के बीच भी मौलाना असरारुल हक़ ने किशनगंज लोकसभा सीट को रिकॉर्ड मतों से जीता था. सभी धर्म और समुदाय के लोगों में उनकी पकड़ थी.

जमीयत उलेमा–ए–हिंद के पूर्व प्रदेश अध्यक्ष एवं ऑल इंडिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड के सदस्य कासमी पहली बार 2009 में मुस्लिम बहुल किशनगंज सीट से लोकसभा चुनाव जीते थे. 2014 के चुनाव में भी उन्होंने यहां अपनी जीत बरकरार रखी थी.

राजनीतिक पृष्ठभूमि

1957 और 1962 के चुनाव में इस सीट से कांग्रेस के मोहम्मद ताहिर जीते. 1967 के चुनाव में इस सीट से विजयी रहे पीएसपी के एलएल कपूर. उन्होंने मोहम्मद ताहिर को शिकस्त दी. 1971 में इस सीट से कांग्रेस के जमीलुर रहमान जीते. 1977 में बीएलडी के हलीमुद्दीन अहमद को किशनगंज की जनता ने चुनकर दिल्ली भेजा. इसके बाद 1980 और 1984 के चुनावों में यहां की जनता का जनादेश कांग्रेस के उम्मीदवार जमीलुर रहमान के पक्ष में आया. 1985 में यहां उपचुनाव हुए जिसमें जेएनपी के सैय्यद शहाबुद्दीन जीते. 1989 में किशनगंज से कांग्रेस ने पत्रकार एम. जे. अकबर को उतारा और वे जीतकर लोकसभा पहुंचे. 1991 में इस सीट से फिर सैय्यद शहाबुद्दीन जीत गए. 1996 में किशनगंज से जनता दल के मोहम्मद तस्लीमुद्दीन जीते. 1998 में तस्लीमुद्दीन यहां से जीतकर लोकसभा पहुंचे लेकिन इस बार आरजेडी के टिकट पर.

1999 का चुनाव किशनगंज सीट पर काफी रोचक रहा. बीजेपी के युवा नेता सैय्यद शाहनवाज हुसैन ने यहां के दिग्गज तस्लीमुद्दीन को हराकर लोकसभा की सदस्यता हासिल की. लेकिन 2004 में तस्लीमुद्दीन ने शाहनवाज हुसैन को हराकर फिर अपना परचम लहराया. इसके बाद के दो चुनाव 2009 और 2014 में इस सीट से जमीयत उलेमा–ए–हिंद के पूर्व प्रदेश अध्यक्ष एवं ऑल इंडिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड के सदस्य मौलाना असरार–उल–हक़ क़ासमी कांग्रेस के टिकट पर जीतकर दिल्ली पहुंचे.

इस सीट का समीकरण

किशनगंज लोकसभा सीट पर वोटरों की संख्या 1186369 हैं. इसमें से महिला वोटर 561,940 हैं जबकि इस सीट पर पुरुष वोटरों की संख्या 624,429 है.

विधानसभा सीटों का समीकरण

किशनगंज लोकसभा सीट के तहत विधानसभा की 6 सीटें आती हैं– बहादुरगंज, ठाकुरगंज, किशनगंज, कोचाधामन, अमौर और बैसी. 2015 के विधानसभा चुनाव में इनमें से 3 कांग्रेस, 2 जेडीयू और एक सीट आरजेडी ने जीती. किशनगंज लोकसभा क्षेत्र से कांग्रेस के तीन विधायक हैं. किशनगंज विधानसभा से डॉ. जावेद आजाद, बहादुरगंज विधानसभा से तौसीफ़ आलम और अमौर विधानसभा से अब्दुल जलील मस्तान कांग्रेस के विधायक हैं.

2014 चुनाव का जनादेश

16वीं लोकसभा के लिए 2014 में हुए चुनाव में किशनगंज लोकसभा सीट से कांग्रेस उम्मीदवार असरार–उल–हक़ क़ासमी को 493461 वोट मिले. उन्होंने बीजेपी के डॉ. दिलीप कुमार जायसवाल को हराया. जायसवाल को 298849 वोट मिले. वहीं जेडीयू के अख्तारुल इमान को 55,822 वोट मिले। इस सीट से आम आदमी पार्टी ने अलीमुद्दीन अंसारी को उतारा था. उन्हें 15,010 वोट मिले थे.


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