अपनी बेटी को आंगनवाड़ी में पढ़ाते हैं IPS यशवीर, बोले-मैं भी सरकारी स्कूल से पढ़ा हूं


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New Delhi :  सरकारी स्कूलों को बेकार समझने वालों के लिए ये खबर हम लेकर आए हैं। मार्च 2019 की ही बात है UP के IPS ऑफिसर डॉ यशवीर सिंह ने भी अपनी 2 साल की मासूम बेटी अंबावीर का आंगनबाड़ी केंद्र में दाखिला कराया।

वहीं आजकल के लोग हैं जो मामूली कमाई होते हुए भी बच्चों को सरकारी स्कूल में नहीं पढ़ाना चाहते। वही उत्तर प्रदेश, उत्तराखंड के अब तक तीन ऐसे प्रशासनिक अधिकारी अपने बच्चों को आंगनवाड़ी भेज चुके हैं। IPS डॉ यशवीर सिंह ने अपनी 2 वर्ष की बेटी को आंगनबाड़ी केंद्र में भेजकर पूरे प्रदेश में एक और मिसाल कायम की है। यशवीर सिंह कहते हैं कि अम्बावीर अब नियमित आंगनबाड़ी केंद्र जाएगी और सामान्य बच्चों संग पढ़ाई करने के साथ पुष्टाहार भी वहीं ग्रहण करेगी। ये तो आप सभी जानते हैं कि आज के टाइम में आम आदमी हो या खास आदमी सब पब्लिक स्कूलों में अपने बच्चों को पढ़ाने के लिए सोचते हैं और पढ़ाते हैं।

पब्लिक स्कूल भी इसका फायदा उठाकर मोटी फीस वसूलते हैं। सरकारी स्कूलों की शिक्षा व्यवस्था अभी भी जमीनी आचरण से बच्चों को जोड़ती है। डॉ यशवीर सिंह कहते हैं कि हम भी सरकारी स्कूल में ही पढ़े-लिखे हैं। अगर सभी सरकारी कर्मचारियों और अधिकारियों के बच्चे सरकारी विद्यालयों में पढ़ने लगें तो निश्चित रूप से शिक्षा व्यवस्था सुधरेगी। मेरी पत्नी प्रियंका सिंह की भी मंशा रही है कि बेटी का दाखिला आंगनबाड़ी केंद्र में कराया जाए, ताकि वह हमउम्र बच्चों के साथ कुछ पल गुजार सके।

पहले ही दिन अम्बावीर अन्य बच्चों के साथ काफी घुलमिल गई। वह उनके साथ बेहद खुश भी नजर आई। इतना ही नहीं, उसने एमडीएम में बने चावल-सब्जी को अन्य बच्चों के साथ पूरे चाव से खाया। IPS यशवीर कहते हैं पब्लिक स्कूलों में दाखिला कराने की होड़ के बीच सरकारी शिक्षण व्यवस्था अभी भी प्रभावशाली है। कम से कम मुझे तो अपने निर्णय से ऐसा महसूस हो रहा है।


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