जब सिपाही बहाली में भर्ती होने पहुंच गए थें लालू


0

राष्ट्रीय जनता दल के प्रमुख लालू प्रसाद यादव की प्रारंभिक जिंदगी बेहद तंगहाली और मुफलिसी में गुजर रही थी. बड़े भाई के साथ पटना के चपरासी क्वार्टर में रहकर लालू ने मैट्रिक पास कर ली थी.

उसी दौरान बिहार पुलिस में सिपाही बहाली के लिए विज्ञापन निकला हुआ था. लालू ने पेपर में सिपाही बहाली का विज्ञापन देखा तो पहुंच गए सिवान. वहां तेजतर्रार आइपीएस अधिकारी शिवचंद्र झा की निगरानी में ये सिपाही भर्ती प्रक्रिया चल रही थी.

रस्सी कूद होने वाली थी. युवकों की भीड़ लगी हुई थी. इसी बीच में मुंह में पान दबाए एक दुबला पतला युवक ने शिवचंद्र झा से पूछ डाला कि ऐ एसपी साहेब ! हाई जंप करवा रहे हैं, वो ठीक है लेकिन ई रस्सी एतना उंचा काहे बंधवा दिए है ! कूदने के चक्कर में अगर कही रस्सिया पैर में अझूराया तो लोलवे फट जाएगा. इ गोरमिंट नौजवान सब का गोड़ हाथ टूटने फूटने की जिम्मेदारी अपने उपर लेगा का !

इसपर तो शिवचंद्र झा चकरा गए और समझाने के लिए कहा कि देखो बेटा, सिपाही का काम कानून व्यवस्था को कंट्रोल करना होता है. उसको दौड़ने, उछलने, कूदने, भागने, तड़पने में माहिर होना चाहिए.

इस पर नौजवान लालू ने तत्काल जवाब दिया: ऐ हजूर हई रखिए महाराज अपना नौकरी के. हमरा से ई कूदल नहीं जाएगा. हमरा किस्मत में सिपाही नहीं राजा बने के लिखल हव. हम सिपाही नहीं राजा बनेंगें आउर हई लम्बा रस्सी कूदने वाला नियम खतम करा देंगें.

आइपीएस मुंह देखते रह गए और लालू ग्राउंड से बाहर निकल गए. शिवचंद्र झा ने लालू को रोका और पूछा कि क्या नाम है तुम्हारा, जी लालू प्रसाद, वेटनरी काॅलेज क्वार्टर में रहते हैं. भईया आदेशपाल है. यही शिवचंद्र झा 2008 में बिहार के डीजीपी बनें थें. उस दौरान लालू रेलमंत्री थें. शिवचंद्र झा अपने लोगों से ये कहानी बड़े चाव से सुनाते हैं.


Like it? Share with your friends!

0

0 Comments

Your email address will not be published. Required fields are marked *