Video: अररिया से कौन बनेगा सांसद?


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सीमांचल कोसी की यह ज़िला प्रसिद्ध हिंदी साहित्यकार फणीश्वरनाथ रेणु की कर्मभूमि रहा है. बिहार में नेपाल की तराई से सटा हुआ अररिया जिला पहले पूर्णिया का हिस्सा था जिसे 1990 में जिला बना दिया गया. सात सीटों में से सिर्फ अररिया को भाजपा ने अपने लिए चुना है। अब तक भाजपा तीन बार इस सीट से जीत दर्ज कर चुकी है। लेकिन आम लोकसभा चुनाव 2014 और उपचुनाव 2018 में उसे हार का सामना करना पड़ा था।यहां तीन बार भाजपा तो तीन बार राजद को जीत मिल चुकी हैं।

2009 में भाजपा जदयू के साथ मैदान में उतरी थी, जिसमें उसे जीत मिली थी। उस वक्त राजद के साथ लोजपा का गठबंधन था और लोजपा ने अपना प्रत्याशी उतारा था। वहीं, 2014 में भाजपा और लोजपा का गठबंधन था, जबकि जदयू अलग था।

2014 के लोकसभा चुनाव में अररिया सीट पर भाजपा के प्रदीप कुमार सिंह चुनाव लड़ रहे थे। दूसरी ओर से राजद के प्रत्याशी मो. तस्लीमुद्दीन थे। जदयू ने विजय मंडल को अपना प्रत्याशी बनाया था। मो. तस्लीमुद्दीन 407978 वोट मिले थे और वे प्रदीप सिंह से 146504 वोट से जीत गये थे।

कार्यकाल के बीच में ही मो. तस्लीमुद्दीन की हुई मौत के बाद मार्च 2018 में हुए उपचुनाव तक परिस्थितियां बदल गयी थी। भाजपा और जदयू का गठबंधन हो गया था। भाजपा ने फिर प्रदीप कुमार सिंह को मौका दिया था। लेकिन राजद की ओर से मैदान में उतरे मो. तस्लीमुद्दीन के विधायक पुत्र सरफराज आलम बिजय रहे उपचुनाव में आरजेडी के सरफराज आलम ने बीजेपी के प्रदीप सिंह को 61,788 मतों के अंतर से हराया।

भाजपा का कमल सबसे पहले 1998 में अररिया में खिला था। जब रामजी दास ऋषिदेव ने जीत दर्ज की थी। हालांकि वे मात्र 13 माह ही सांसद रह पाये। उसके बाद 2004 में सुकदेव पासवान ने भाजपा को जीत दिलायी। उसके बाद 2009 में प्रदीप सिंह जीते।

2014 1998 में बीजेपी के रामजी दास ऋषिदेव जीते. फिर 1999 के चुनाव में सुखदेव पासवान आरजेडी के टिकट पर जीते. लेकिन 2004 के चुनाव में सुखदेव पासवान बीजेपी के खेमे से उतरे और फिर इस सीट पर कब्जा किया।

अररिया लोकसभा निर्वाचन क्षेत्र में छह विधानसभा क्षेत्र शामिल हैं– नरपतगंज, रानीगंज(सुरक्षित), फारबिसगंज, अररिया, जोकिहाट और सिकटी. जिसमें से 4 पर NDA काबिज है वहीं 1 सीट कांग्रेस और एक आरजेडी के पास है।

सरफराज आलम अररिया से आरजेडी के टिकट पर जीतकर लोकसभा पहुंचे. वे आरजेडी के वरिष्ठ नेता स्वर्गीय मोहम्मद तस्लीमुद्दीन के बेटे हैं. इससे पहले विधायक के रूप में सरफराज आलम सियासत में उतरे थे. साल 2000 में आरजेडी के टिकट पर और 2010 और 2015 में वे जेडीयू के टिकट पर जोकीहाट सीट से जीतकर बिहार विधानसभा पहुंचे थे. 2016 में उन्हें जेडीयू से सस्पेंड कर दिया गया. फरवरी 2018 में सरफराज आलम फिर आरजेडी में शामिल हो गए. मार्च 2018 में आरजेडी ने उनके पिता के निधन के बाद लोकसभा उपचुनाव में उतारा और अररिया से जीतकर सरफराज आलम लोकसभा के सदस्य बने।

कुल मतदाता: 1605455 पुरुष मतदाता 850712 महिला मतदाता 754743 हैं।

वही 2019 में फिर से दोनों पुराने लोग आमने सामने हैं वही अन्य पार्टी से व निर्दलीय भी चुनावी मैदान मे हैं।


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