दुश्मनों का काल कहलाते हैं AIR FORCE के गरुड कमांडो..बड़ी कठिन होती है इनकी ट्रेनिंग


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New DelHI : गरुड कमांडो (Garud Commando) भारत के सर्वश्रेष्ठ कमांडोज में से एक हैं। गरुड कमांडो AIR FORCE की कमांड में ऑपरेशन को अंजाम देते हैं। 2001 में AIR FORCEके दो हवाई अड्डे आतंकी हमलों की चपेट में आ गए तब इस बल का गठन हुआ।

2003 में गरुड़ कमांडो फोर्स की स्थापना की गई। गरुड़ कमांडो (Garud Commando) की ट्रेनिंग नौसेना के मारकोज और आर्मी के पैरा कमांडो के आधार पर की गई है। इन्हें एयरबोर्न आपरेशन (वायुयान संचालन), एयरफील्ड सीजर) हवाई क्षेत्र पर कब्जा, और आतंकवादियों से मुकाबला करने का प्रशिक्षण भी दिया जाता है। गरुड़ कमांडो ने जम्मू-कश्मीर में विद्रोहियों का मुकाबला भी किया है। शांति के समय गरुड़ कमांडो का प्रमुख कार्य भारतीय वायु सेना के एयर फील्ड की रक्षा करना होता है। थल सेना और वायु सेना की तरह गरुड़ कमांडो वॉलंटियर नहीं होते। विशेष फोर्स के लिए ट्रेनिंग हेतु इनकी सीधी भर्ती की जाती है। साथ ही, एक बार गरुड़ फोर्स ज्वाइन करने के बाद कमांडो अपने शेष करियर के दौरान यूनिट के साथ ही रहते हैं। इससे यह पुष्ट होता है कि यूनिट के पास लंबे समय तक बेहतरीन जवान रहें।

हालांकि, गरुड़ कमांडो (Garud Commando) में भर्ती होना कोई आसान काम नहीं है। सभी रंगरूटों के लिए बेसिक प्रशिक्षण कार्यक्रम 52 सप्ताह तक चलता है, जो भीरतीय विशेष बलों के प्रशिक्षण कार्यक्रमों में सबसे लंबा है। शुरुआत के तीन महीने बेहत संघर्षपूर्ण होते हैं। इनमें से सर्वश्रेष्ठ लोग ही ट्रेनिंग के अगले चरण में प्रवेश कर पाते हैं। प्रशिक्षण का दूसरा चरण विशेष फ्रंटियर फोर्स, भारतीय सेना और राष्ट्रीय सुरक्षा गार्ड के साथ जुड़ा होता है। इस चरण में सफल होने वाले लोग की प्रशिक्षण के अगले चरण में जगह बना पाते हैं। इस दौरान उन्हें कठिन शारीरिक और मानसिक प्रशिक्षण से गुजरना पड़ता है। इसका उद्देश्य भावी जवानों के हर परिस्थिति का मुकाबला करने के योग्य बनाना होता है।

इस कठिन परीक्षण में सफल होने वाले लोगों को आगरा स्थित पैराशूट ट्रेनिंग स्कूल में भेजा जाता है। यहां उन्हें आपात स्थिति में चलते हवाई जहाज या हेलीकॉप्टर से प्रभावित क्षेत्र में कार्रवाई को अंजाम देने के लिए प्रशिक्षित किया जाता है। उन्हें पैराशूट की सहायता कूदने का प्रशिक्षण भी दिया जाता है। इस दौरान रंगरूट मार्कोज और पैरा कमांडो की तरह ही पैरा बैज पहनते हैं।

गरुड़ कमांडो (Garud Commando) को मिजोरम स्थित सेना के जवाबी कार्रवाई और जंगल वारफेयर स्कूल (सीआईजेडब्ल्यूएस) में प्रशिक्षण दिया जाता है। दुनिया भर के अलग-अलग देशों की सेनाओं के सैनिक सीआईजेडब्ल्यूएस आते हैं, जो जवाबी कार्रवाई में भारत के व्यापक अनुभव से सीखते हुए ऐसी कार्रवाइयों को अंजाम देना सीखते हैं। प्रशिक्षण के अंतिम चरण में गरुड़ कमांडो को भारतीय सेना के पैरा कमांडो की सक्रिय इकाइयों के साथ जोड़ा जाता है, ताकि उन्हें कार्य करने का पहला अनुभव मिल सके। इस दौरान वह उन कार्यों को अंजाम देते हैं जिनका प्रशिक्षण उन्हें अब तक मिला होता है। इस दौरान यह परखा जाता है कि जो प्रशिक्षण उन्हें दिया गया है उस पर वह किस स्तर तक खरे उतरे हैं।

गरुण कमांडो (Garud Commando) दुनिया के सबसे घातक हथियारों से लैस होते हैं। इनमें टेवर टार-21 असॉल्ट रायफल, ग्लॉक 17 और 19 पिस्टल होती हैं। करीबी युद्धों के लिए हेकलर और कोच एमपी5 सब मशीन गन होती हैं। इसके अलावा गरुड़ कमांडो के पास घातक एकेएम असॉल्ट रायफल, एके-47 और एम4 कार्बाइन होती है। ये हथियार दुनिया के सबसे घातक हथियारों में शुमार किए जाते हैं।


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