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गुजरात से बिहारियों को मार-मारकर भगाया जा रहा है और बिहार के नेता ‘POLITICS’ कर रहे हैं

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PATNA : गुजरात में बिहारियों, उत्तरप्रदेश और मध्यप्रदेश वालों के साथ जो कुछ भी हो रहा है वो कोई नई बात नहीं है। चुनाव के वक्त ऐसा माहौल बनाया जाता है ताकि क्षेत्रवाद के नाम पर गुजराती, मराठी, असमी, बंगाली आदि वोटों का धुर्वीकरण किया जाय और इनके वोट पाकर चुनाव में जीत हासिल की जाय और जीत जाने के बाद अपने भाषणों में सीना तानकर यह कहा जाय कि हमारा प्रदेश सारे भारतीयों का दिल खोल के स्वागत करता है। तत्काल किसी भी पार्टी का कोई भी नेता कुछ नहीं बोलेगा और ना ही कोई आंदोलन ही होगा क्योंकि किसी को वोट की चिंता है तो किसी को एलायंस की। और सबसे दुःखद बात यह है कि इन सब स्थानों पर सबसे ज़्यादा भुक्तभोगी बिहारी लोग ही होते हैं और बिहार के नेता और बिहारी आवाम चुपचाप यह अपमान सहन करते हैं। इन्हें पता है कि बिहार में तो ये अपना पेट पाल नहीं सकते तो जब मामला ठंडा होगा तो इन्हें वापस यही आना है, अगर तबतक भूखे नहीं मारे तो!

जिस व्यक्ति ने बलात्कार जैसी जघन्यतम अपराध को अंजाम दिया उसको कड़ी से कड़ी सजा तो मिलनी ही चाहिए, चाहे वो किसी भी राज्य का हो लेकिन किसी एक व्यक्ति के कुकृत्य की सज़ा पूरी कॉम्युनिटी को देना कहाँ का न्याय है और सजा देना ही है तो इस देश का कानून व्यवस्था सजा देगा। किसी भी पार्टी/सेना और उनके गुंडों को किसने यह हक़ दिया कि वो किसी भी मुद्दे पर अपना फैसला सुनाए और उसे बलात लागू करे? क्या जाति और धर्म के नाम पर बनी सारी पार्टियों और सेनाओं को प्रतिबंधित नहीं किया जाना चाहिए? और पार्टियों और उनके प्रवक्ता को तो हर मामले पर कुकुरहाऊं करने की अद्भुत ट्रेनिंग दी ही जा चुकी है।

इस देश में किसी भी प्रदेश के नागरिक को, किसी भी प्रदेश में जाकर अपनी रोज़ी रोटी कमाने का अधिकार है; उन्हें कहीं से भी कोई भी जबरन निकालता है तो इसे किसी भी क़ीमत पर बर्दाश्त नहीं किया जाना चाहिए। लेकिन आज लोकतंत्र और लोकतांत्रिक अधिकार की बात करे भी तो कौन? बिहारी मार मारकर भगाए जा रहें हैं और बिहार के नेता और जनता को शायद ही कोई फर्क पड़ता है! बहरहाल, चुनाव का साल है और इस तरह की बातें ख़ूब होंगीं ताकि जनता सब भूलकर जाति, धर्म, समुदाय, क्षेत्रवाद आदि के नाम पर गोलबंद होकर किसी को भी अपना वोट देकर सब ठीक हो जाने का हवाई किला बनाता रहे और इस देश-प्रदेश के सत्ता लोभी नेता अपना उल्लू सीधा करते रहें।

लेखक : पुंज प्रकाश, वरिष्ठ रंगकर्मी, पटना

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